हिंदीब्लॉगजगत
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क्या किया जाय? - कभी-कभी औरतों को सेक्सुअल अब्यूज़ इस तरह से झेलना पड़ता है कि समझ में नहीं आता कि इसे अब्यूज़ मानें या न मानें और अगर मानें तो प्रतिक्रिया किस तरह से व्यक्त क...4 घंटे पहले
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" कहानी .......एक जोड़े की " - एक प्यारा सा जोड़ा था , दोनों ने तिल तिल , आपस में प्यार था जोड़ा , इस जोड़े हुए प्यार से उनकी , हयाते-राह खुशगवार हुई , जोड़ा जोड़ने की , ख्वाहिश लिए , ख...9 घंटे पहले
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समाचार, विज्ञापन और चिट-फंड की नैतिकता - भूपेन सिंह -भूपेन सिंह** *एक गुलाम और नागरिक के बीच का फ़र्क यही है कि गुलाम मालिक के मातहत होता है और नागरिक कानून के. हो सकता है कि मालिक बहुत विनम्र हो...11 घंटे पहले
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संवाद और लेखन की प्रासंगिकता - *हे मानवश्रेष्ठों*, काफ़ी समय पहले एक* युवा* मित्र मानवश्रेष्ठ से *संवाद* स्थापित हुआ था जो अभी भी बदस्तूर बना हुआ है। उनके साथ कई सारे विषयों पर लंबे स...16 घंटे पहले
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तुकबंदी अच्छी है, लेकिन लालसाओं का क्या किया जाए! - *अंजनी कुमार * *मार्क्स के निजी जीवन प्रसंगों पर एक टिप्पणी से शुरू हुई बहस के क्रम में * *अंजनी कुमार** की एक अहम प्रतिक्रिया आई है जिसमें उन्होंने मार्...18 घंटे पहले
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भ्रष्टाचार हमारे खून में -सतीश सक्सेना - *आजकल भारतीयों में भ्रष्टाचार पर बोलने का शौक चर्राया हुआ है , कुछ वर्ष पहले यह हवा में इतना नहीं फैला था, हां कुछ ईमानदार राजनीतिक पार्टियाँ, जो बेचारी ब...22 घंटे पहले
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एक मामूली आदमी की डायरी-1 - आजकल दो चीज़ों से बहुत परेशान हूं। पहली तो ये कि मेरी किसी भी 'बड़े आदमी' से कोई पहचान नहीं है। जिससे भी मिलता हूं, वो किसी न किसी तगड़ी पहचान के साथ आगे ...23 घंटे पहले
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New bridge - Nuovo ponte - नया पुल - [image: Building new bridge in Omnogobi, Uvs, Mongolia - S. Deepak, 2008] [image: Building new bridge in Omnogobi, Uvs, Mongolia - S. Deepak, 2008] [image: B...1 दिन पहले
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रूबरू : सत्यजित रे - मैं एक ऑब्जर्वर की भूमिका में रहा हूँ - अनुवाद व प्रस्तुति : *संदीप मुद्गल* * * सत्यजित रे के सिने जगत में अगर ‘अपु त्रयी’ का स्थान सबसे ऊपर है तो 1970 के दशक की शुरुआत में ‘कलकत्ता त्रयी’ ने उनकी...1 दिन पहले
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क्या लिखूँ ? - क्या लिखूँ ? खुद पर तुम पर रिश्तों पर प्यार पर क्यों लिखूँ ? जब झूठ ही लिखना है। कभी धान कभी खील कभी लाई और कभी उसके चावल को ही गला देना है जब। कैसे लिखूँ ...1 दिन पहले
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डायरी में से - डायरी में से पंद्रह दिन पहले के कुछ अंश - 2 मई 2013 - अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के दफ्तर में। अप्रेफा (या निधि कहें तो अप्रेनि) एक निजी संस्थान द्वारा स्कूल...1 दिन पहले
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जन्नत कहीं है तो बस यहीं है , यहीं है -- मॉल कल्चर। - कॉलेज के दिनों में अक्सर शाम को दोस्तों के साथ मार्किट की ओर निकल जाते थे , मटरगश्ती करने। खरीदारी करने की न कोई वज़ह या ज़रुरत होती थी , न हैसियत। जेब मे...1 दिन पहले
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डायरी के पन्ने- मई 2013- द्वितीय - [हर महीने की पहली व सोलह तारीख को डायरी के पन्ने छपते हैं।] *1 मई 2013, बुधवार* *1.* आज की तो वैसे मेरी छुट्टी थी, फिर भी कपडे वगैरह धोने के कारण दिल्ली ही ...3 दिन पहले
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एक थी डायनः बर्बरता की संस्कृति की आपराधिक दुकानदारी... - अंधविश्वास के अंधकार में... - पिछले साल मई में सरकार ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि 2008 से 2010 के बीच डायन के संदेह में पांच स...3 दिन पहले
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तू नहीं तो ज़िंदगी में और क्या रह जाएगा : कौन हैं इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दिकी ( Iftikhar Imam Siddiqui ) ? - फिल्म 'अर्थ' और उसका संवेदनशील संगीत तो याद है ना आपको। बड़े मन से ये फिल्म बनाई थी महेश भट्ट ने। शबाना, स्मिता का अभिनय, जगजीत सिंह चित्रा सिंह की गाई या...3 दिन पहले
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प्रमुख समाजवादी चिन्तक ,राजनेता और लोकप्रिय हिंदी कवि श्री उदय प्रताप सिंह की ग़ज़लें - श्री उदय प्रताप सिंह वरिष्ठ कवि एवं कार्यकारी अध्यक्ष उ०प्र०हिन्दी संस्थान ,लखनऊ सम्पर्क -09455004790 न तेरा है न मेरा है ये हिन्दुस्तान सबका है नहीं समझी...4 दिन पहले
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पैसे का लोकतंत्र और पैसे की ख़बरें - भूपेन सिंह केंद्र की यूपीए सरकार पेड न्यूज़ छापने वाले मीडिया संस्थानों के ख़िलाफ़ कोई कदम उठाने के मामले में तो पहले ही हाथ खड़े कर चुकी है, अब वह चुनावों ...4 दिन पहले
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मृत्यु के कुछ पहले - *मरने की उम्र*राजकिशोरhttp://raajkishore.blogspot.com/ क्या मरने की भी कोई उम्र हो सकती है? यह तो हजारों साल से पता है कि कोई भी आदमी अमर नहीं है। जिसका जन...4 दिन पहले
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Summer Vacation 2013,, Meghdoot Backyard, - A short time out from daily chores and ofcourse from blogging too.Meeting you all shortly. Bye! नानापुराणनिगमागम सम्मतं यद रामायणे निगदितं क्वचिदनयतोअपि ....5 दिन पहले
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असुविधा टाकीज़ : लव इन द टाइम आफ कॉलरा - *कॉलरा की चपेट में प्रेम *** विजय शर्मा किसी साहित्यिक कृति पर फ़िल्म बनाना एक बहुत बड़ा जोखिम है। किसी विश्वप्रसिद्ध साहित्यिक कृति पर फ़िल्म बनाना और ब...5 दिन पहले
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सबक सीखे भाजपा - कर्नाटक विधानसभा का परिणाम आ चुका है। दलीलें चाहे जो भी हों, सच्चाई सबके सामने है। भाजपा और जनता दल सेकुलर बराबरी पर आ खड़े हुए हैं। राज्य में कांग्रेस को ...5 दिन पहले
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राष्ट्रीय मुक्ति और संस्कृति: अमिल्कर कबराल - *पश्चिमी अफ्रीकी देश गिनी बिसाऊ के मुक्ति आंदोलन के नेता अमिल्कर कबराल का जन्म 12 सितंबर 1924 को बफाता नामक कस्बे में हुआ था। 1945 में उन्होंने कृषि विज्...5 दिन पहले
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कौन सी कविताएं - (प्रिय कविताओं में से एक नरेश सक्सेना की यह कविता, साथ में एडवर्ड मुंच का चित्र 'मेलनकली') जैसे चिड़ियों की उड़ान में शामिल होते हैं पेड़ क्या कविताएं हों...5 दिन पहले
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शादी में और क्या होना चाहिए? - मौजूदा जरूरत की बीस फीसदी अदालतों में मुकदमे बहुत लंबे चलते हैं। इस बीच मुवक्किल लगातार संपर्क में रहते हैं तो उन से मुहब्बत के रिश्ते कायम होना स्वाभाव...6 दिन पहले
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किसकी किस्मत ज्यादा खराब थी... बकरी की या मंत्री की... - *.* *.* *.* ** * ** **आप ही की तरह अपने को भी खबरें मीडिया से ही मिलती हैं... रेलगेट में भाँजे-भतीजे-बेटे-पत्नी यहाँ तक कि दामादों तक का भी नाम व हाथ सामने...6 दिन पहले
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मात्र दिवस विशेष - माँ तुझे सलाम...! - उसको नहीं देखा हमने कभी पर इसकी जरुरत क्या होगी ? ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की मूरत क्या होगी ? माँ ही मन्दिर, माँ ही मूरत, माँ पूजा की थाली, बिन म...1 सप्ताह पहले
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रहें न रहें हम महका करेंगे...! - वो सारे ख़त जो कभी हमने एक दूजे को लिखे थे... वो सारी बेवजह की बातें... वो साथ बिताये अनगिनत पल... वो हँसी वो खिलखिलाहट जो अब तलक गूंजा करती है यादों की प...1 सप्ताह पहले
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त्रिशूल,चीड़ और भांग --दिग दिगंत आमोद भरा... - आह हा आज तो त्रिशूल दिख रही है. नंदा देवी और मैकतोली आदि की चोटियाँ तो अक्सर दिख जाया करती थीं हमारे घर की खिडकी से। परन्तु त्रिशूल की वो तीन नुकीली ...1 सप्ताह पहले
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बिखरने का सौन्दर्य - मुस्कुराने लगते हैं कॉफ़ी के मग दीवारों पर उगने लगती हैं धडकने दरवाजे जानते हैं दिल का सब हाल खिडकियों बतियाती ही रहती हैं घंटों खाली सोफों पर खेलते है...1 सप्ताह पहले
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PEHLA KADAM - Motivational story by JOLLY UNCLE - पहला कदम जौली अंकल वकील साहब के बेटे ने शाम को कहचरी से आकर अपने पिता के पांव छू कर उन्हें खुशी-खुशी बताया कि आपके आर्शीवाद से आज में पहले ही दिन आपके द्व...1 सप्ताह पहले
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हाथी और अहंकारी गुबरैला ... - एक दिन गुबरैला गोबर से निकल कर घूमते घूमते काली चींटियों की बस्ती में जा पहुंचा . चींटियाँ उसके भारी भरकम शरीर को देखकर आश्चर्य चकित हो गई . कुछ ही दिन म...1 सप्ताह पहले
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विचार-- --नियति (सूक्ति) - अपने विचारों पर ध्यान दो, वे शब्द बन जाते हैं। अपने शब्दों पर ध्यान दो, वे क्रिया बन जाते हैं। अपनी क्रियाओं पर ध्यान दो, वे आदत बन जाती हैं। अपनी आदतों पर...1 सप्ताह पहले
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पीसते हैं चलो ताश की गड्डियां - चाय की जब तेरे साथ लीं चुस्कियां ग़म हवा हो गए छा गयीं मस्तियाँ दौड़ती ज़िन्दगी को जरा रोक कर पीसते हैं चलो ताश की गड्डियां जब तलक झांकती आंख पीछे ...1 सप्ताह पहले
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पब्लिक सब जानती है : जॉन अब्राहम - -अजय ब्रह्मात्मज खान त्रयी और कपूर हीरो सरीखा स्टार कद रखते हैं जॉन अब्राहम। वे मार्केटिंग के स्टूडेंट रहे हैं और उसका बखूबी इस्तेमाल अपनी फिल्मों मे...2 सप्ताह पहले
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ब्रेख्त की तीन छोटी कविताएँ और मित्र की याद - पिछले साल कुछ समय एक जर्मन मित्र के साथ बिताया जिन्हें इत्तेफ़ाक से कविताओं में भी रूचि है। हमनें तय किया कि हम जब भी मिलें कवितापाठ का कार्यक्रम निर्ध...2 सप्ताह पहले
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रिश्तेदारियां - *मेरा हुलिया देखकर ज्यादातर लोग मुझे मामूली आदमी समझने की गलती कर बैठते हैं। आप तो ऐसा न करें। आम तौर पर मैं बताता नहीं, लेकिन मेरी रिश्तेदारी देश-दुनिया क...2 सप्ताह पहले
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भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष - 5 : - मेनस्ट्रीम सिनेमा में तेलुगु फिल्में कहॉं हैं? *विनोद साव.* ------------------------------ भारतीय सिनेमा ने अपने गौरवशाली सौ वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस अवसर...2 सप्ताह पहले
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मोहनजोदारो के मेलूहा The Meluha of Mohenjo Daro - The english version 'The Meluha of Mohenjo Daro' is given at the end of this article. मोहनजोदारो के मेलूहा अमीश त्रिपाठी ने 'मेलूहा के मृत्युंजय' (Th...2 सप्ताह पहले
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अस्मिता,आम्बेडकर और रामविलास शर्मा - रामविलास शर्मा के लेखन में अस्मिता विमर्श को मार्क्सवादी नजरिए से देखा गया है। वे वर्गीय नजरिए से जातिप्रथा पर विचार करते हैं। आमतौर पर अस्मिता साहित्य पर...3 सप्ताह पहले
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आँखों देखा हाल और हम हुए बेहाल ... जय हो सन्तों की - संतों के संत ,भगवानों के भगवान , सदी के महानतम पुरुष का पंडाल सजा हुआ है! संत शिरोमणि का प्रवचन शुरू हो चुका है! अहा ..क्या भक्ति की गंगा प्रवाहित हो रही ह...3 सप्ताह पहले
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अधूरा ईश्वर.. - कहते हैं कि यह संसार/कायनात/सृष्टि/ब्रह्माण्ड ईश्वर की रचना है या फिर यह सब कुछ ही ईश्वर है जिसे सूफ़ियों ने हमा ओस्त कहा है। इस बात में मुझे कुछ दुविधा ...3 सप्ताह पहले
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चाय में चीनी जरा कम है, ये आज का पहला गम है - चाय में चीनी जरा कम है, ये आज का पहला गम है। IPL में चौके हैं, छक्के हैंचीयरबालायें बेदम हैं। चीन का तंबू तिब्बत में,उनके यहां जगह कम है। -कट्टा कानपुरीये ...3 सप्ताह पहले
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सही-ग़लत और दाऊद... - कभी कभी सही- ग़लत, अच्छे-बुरे में फ़र्क इतना धुंधला हो जाता है कि माथा भन्ना जाता है। या फिर ये कि ऐसी कोई बात है ही नहीं, बस मनघड़न्त परीभाषायें हैं, यूँ दे...3 सप्ताह पहले
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फिर भी छोटा आँगन है - आपस में अपनापन है फिर भी छोटा आँगन है मुख पर खुशियों का विज्ञापन पर आँखों में सावन है खुशियों के पल और शबनम का कितना त्वरित समापन है माँगों में सिन्दूर भर...4 सप्ताह पहले
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रंग सक्रिय बेगूसराय - रंगमंचीय विमर्श के जनपद में एक बात पर सहमति है किरंगमंच का विस्तार दिल्ली, मुंबई, कोलकाताजैसे बड़े केन्द्रों से बाहर उसका छोटे शहरों और कस्बों में करना हो...4 सप्ताह पहले
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We need many more India Gates for justice! - Image courtesy : The Indian Express *‘She was gangraped by 16 boys, nine of them juveniles. She was beaten, cut up and her genitals mutilated. She made it t...4 सप्ताह पहले
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पिण्ड छोड़ भी कविता - चलो आज कुछ बता ही दिया जाए कविता की पैदाइश के बारे में उम्र, तजुर्बे और प्रतिष्ठा की ऊँची मीनार पर चढ़े पिता के भारी-भरकम आदेश, उपदेश और झिड़कियां गिरते ...4 सप्ताह पहले
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मोढ़ेरा का सूर्य मन्दिर - अब यहाँ पूजा-अर्चना नहीं होती क्योंकि मन्दिर खिल्लजी द्वारा खंडित कर दिया गया था, साथ ही भगवान सूर्य की स्वर्ण प्रतिमा तथा गर्भ-गृह के खजाने को भी इस मुस्ल...5 सप्ताह पहले
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अनुवाद से संबंधित 100 महत्वपूर्ण ब्लॉग - इंटरनेट के आने के बाद स्वतंत्र अनुवादकों का एक ऐसा समूह सामने आया है जिसने अनुवाद को उसके परंपरागत क्षेत्र से बाहर निकालकर सार्वजनिक जीवन के बड़े दायरे से ...5 सप्ताह पहले
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टूटे बिखरे सच को - टूटे बिखरे सच को जब कोई पिरोने की कोशिश करता है सपनों से तो वह संकोच के मारे वीतराग हो जाता है और दुनिया को बदल देने की ज़िद में हो जाता है दीवाना यह सच...5 सप्ताह पहले
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बस दाद चाहिए..बस वाह चाहिेए - यूं तो कवि सम्मेलन हर जगह होता है…और जगह मिलते ही कवि अपने प्रतिभा का भरपूर परिचय भी देता है…लेकिन बात तब गंभीर हो जाती है जब घंटे दो घंटे के समय सीमा मे...1 माह पहले
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पान सिंह तोमर वाया साहिब, बीवी अौर गैंग्स्टर - ज़्यादा पुरानी बात नहीं है। ‘पान सिंह तोमर’ बनकर तैयार थी अौर उसे मठाधीशों द्वारा सार्वजनिक प्रदर्शन के अयोग्य ठहराकर डिब्बे में बंद किया जा चुका था। निर्द...1 माह पहले
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नैक्सस ७ टैबलेट भारत में आधिकारिक रूप से जारी, प्रीबुकिंग शुरु @₹१६,००० - गूगल का आसुस द्वारा निर्मित प्रसिद्ध नैक्सस ७ टैबलेट (१६ जीबी, वाइ-फाइ) भारत में प्ले स्टोर पर प्रीबुकिंग के लिये उपलब्ध हो गया है। इसकी कीमत १६,००० रुपये ...1 माह पहले
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युद्ध का जख़्मी शरीर - *एक** **मरणासन्न रिटायर फ़ौजी की आख़िरी चिट्ठीः पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और पूर्व रक्षा मंत्री डिक चेनी के नाम संदेश* *मूल अंग्रेज़ी से अनुवाद**/**रूपां...1 माह पहले
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हिन्दी विश्वविद्यालय के लिए हिन्दी-कम्प्यूटरी पाठ्यक्रम - हिन्दी में शिक्षण एवं विचार-विनिमय को बढ़ावा देने की विशेष पहल के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है। मेरा विचा...1 माह पहले
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होली का हुड़दंग - आज होली है, इंटरनेट और फ़ेसबूक पर सभी दोस्त यार एक दूसरे को होली की शुभकामनाएँ दे रहे है। लेकिन हमारी स्थिति अजीब है, हम ऑफिस में बैठे हुए अभी भी उन ऊलजुलू...1 माह पहले
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भगत सिंह – संक्षिप्त जीवन-यात्रा - “क्रांति से हमारा अर्थ है – अंत में समाज की ऐसी व्यवस्था की स्थापना जिसमें किसी प्रकार के हड़कम्प का भय न हो, जिसमें मज़दूर वर्ग के प्रभुत्व को मान्यता दी ...1 माह पहले
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मुन्ना भाई देखा... एक बार खलनायक और अग्निपथ भी देखिए काटजू साहब!!! - करीब बीस साल पहले हुए मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टाडा अदालत में सजा पाए वांछित आरोपी याकूब मेनन की सजा को बरकरार...1 माह पहले
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टीवी पत्रकारों पर दुनियां का सबसे बड़ा उंगलबाज.कॉम का सर्वेक्षण: ---उंगलबाज.कॉम - उंगलबाज.कॉम ने तीन महीने के अथक परिश्रम के बाद होली के अवसर पर उस सर्वेक्षण को आपके सबके बीच लाने का निर्णय ले ही लिया है, जिसका इंतजार ब्रेकिंग और सिर्फ...1 माह पहले
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पैनस्टार्स ने तो निराश किया अब इसान से ही आशा! - आकाश में एक हप्ते से आँखें गड़ाए रखने के बावजूद भी जब पैनस्टार्स धूमकेतु नहीं दिखा तो आज मैंने हार मान ही ली .वैसे दो एक दिन तो बादलों की धमाचौकड़ी ने खेल ...2 माह पहले
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दया याचिका, राजनीति और राष्ट्रपति - *उमेश चतुर्वेदी*** *(प्रथम प्रवक्ता में प्रकाशित)* मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब और फिर संसद हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के बाद दया याचिकाओं के निबटारे ...2 माह पहले
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गुलमर्ग: सपरिवार - पिछली बार 28 जनवरी 2012 को गुलमर्ग गया था, इस बार भी तारीख वही थी, 28 जनवरी पर साल था 2013, एक और खास बात थी, और वह थी - परिवार का साथ होना! ...2 माह पहले
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परती-परिकथा- कथा अनंता - अंचल में रच-बस जाने के बाद आपका कथावाचक ग्राम्य- कथाओं के तार सुलझाने में लग गया है। कथा भी ऐसी, जो कभी खत्म ही न हो- परती-परिकथा-कथा अनंता….! तो चलिए आज ...2 माह पहले
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ख़त... - *जैसे ठंड के दिनों में सुबह टांगे पर बैठकर स्कूल जाना... परिक्षा के दिनों में खेलने के आधे घंटे का सुख चुरा लेना... अपने घर के अंधेरे कोने में तकिये लगाकर ...2 माह पहले
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मेरी पसन्द........ - *इक बार कहो तुम मेरी हो........* *-----------------------------------* *हम घूम चुके बस्ती-वन में इक आस का फाँस लिए मन में कोई साजन हो, कोई प्यारा हो कोई दी...2 माह पहले
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आम बजट वर्ष 2013-2014 हिंदी में - नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदम्बरम द्धारा वर्ष 2013-2014 के लिए पेश आम बजट का पूरा हिंदी भाषण यहां पेश है। इसके अलावा बजट में किए गए मुख्य प्...2 माह पहले
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स्टेट बैंक ऑफ धकियाचमन - लफत्तू के भाई ने इन पैसों को अपने पापा की जेब से चुराया था जिन्हें पराक्रमी लफत्तू उसकी जेब से अंटी कर लाया था. मेरे लिए यह कल्पना ही सिहरा देने वाली थी की...2 माह पहले
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डर - Picture with thanks from google.. अंदरूनी और बाहरी डर हमें डर लगता है, केवल बाहरी कारणों से ही नहीं, अपने अंदर से भी। नौकरी-धंधा छूट जाने का डर, भोजन-पानी ...2 माह पहले
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कितने सक्षम है युवा जीवन साथी चुनने में - - - - - -mangopeople - नोट --- मुद्दे शायद कई आ गए है इसलिए विचार कही घुले मिले से लेगे तो झेल लीजियेगा एल आई सी का विज्ञापन " चाचु आप को शादी के लिए कैसी लड़की चाहिए " चाचू ज...2 माह पहले
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समकालीन कविता - * * *संकट हिंदी कविता नहीं असल में हिंदी आलोचना का है*** मुंबई ये प्रकाशित पत्रिका चिंतनदिशा में पिछले कुछ अंकों से चल रही बहस को आप यहां पढ़ते आए हैं. प...2 माह पहले
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पुष्प प्रदर्शनी में निर्भया - हर साल मुंबई में फूलों और सब्जियों की प्रदर्शनी लगती है। इस बार भी यह प्रदर्शनी लगी और ढेर सारे लोगों ने फूलों सब्जियों की इस प्रदर्शनी का आनंद लिया। ...3 माह पहले
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नदी नाव जैसा है रिश्ता हमारा - कभी तो डुबाया कभी पर उबारा नदी नाव जैसा है रिश्ता हमारा कहीं गहरा पानी कहीं तेज धारा समझते रहे थे जहाँ इक किनारा रहा हमसफ़र जो रहा हम निवाला उसी ने ही इस द...3 माह पहले
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हर शाख पर खिलेंगे भगत सिंह के सपनों के फूल - वक्तव्य *सत्यनारायण पटेल* यहाँ मौजूद और ग़ैर मौजूद प्यारे सथियो और देश वासियों… सलाम दोस्तों… यह इक्कीसवीं सदी है। देश और दुनिया के बहुत थोड़े लोगों ...3 माह पहले
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महापुराण - (मैं जो कुछ लिख रहा हूँ, उसका कोई मतलब नहीं है | इन फैक्ट वह इतना बेमानी है कि वो क्यों लिखा है इसका कोई मानी नहीं | इस पर झगडा करने वाला भी उतना ही बेवक...3 माह पहले
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बड़की भौजी / कैलाश गौतम - जनकवि कैलाश गौतम (1944 – 2006) विरल प्रजाति के गीतकार थे . लोकभाषा का अनुपम छंद और लोकसंवेदना से गहरी संपृक्ति उनकी कविताओं और गीतों को विशिष्ट किस्म के आत...3 माह पहले
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युवा - हमारा सवेरा ४ बजे का सात्विक सवेरा नहीं... ११ का 'हेंग ओवर' सवेरा है. जो ज़िन्दगी के खट्टेपन को, सपनों के नमक लगा के चाट डालता है. हम, जो बस, पासे के फैंक द...3 माह पहले
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अन्धेरे के भेद... - उसके जिस्म पर कहीं कोई जला निशान नहीं है जिसे वो अपने मां-बाप को दिखाये. उसका चेहरा भी किसी प्रताड़ित की गयी औरत जैसा सूजा हुआ नहीं रहता. बल्कि उसकी आंखें...4 माह पहले
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blog shifted - This blog is shifted to the URL http://shilpamehta1.blogspot.in/ यह ब्लॉग "रेत के महल" अब यहाँ उपलब्ध है http://shilpamehta1.blogspot.in/4 माह पहले
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हमारा टुन्नू - *'शुक्रवार' पत्रिका के 3 जनवरी, 2013 के अंक में छपी यह कहानी पढ़ें और अपनी राय दें। * हे आनंदघन! बहुत दिनों से आपके बारे में सोच रहे हैं- तमाम ख्याल...4 माह पहले
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ऊर्मिला की कहानी - This is an idea for story that I have already written for Indiblogger contest.4 माह पहले
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खेल - वे महान खेलते हैं विनय उनकी कमाल है वे मैचों के लाल हैं कंपनियों के ब्रांड उनकी टोपी उनके जूते उनका घर उनकी कारें उनके ईनाम यहाँ तक कि खेलने की उम्र सब उन...5 माह पहले
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हाथी और जंजीरें - हाथी धरती पर पाए जाने वाले सबसे ताकतवर जीवों में से हैं. इनका वजन 5 से 7 टन तक होता है और ऊँचाई 11 फुट तक. वे बड़े-बड़े वृक्षों को उखाड़ फेंकने की क्षमता र...6 माह पहले
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त्योहार के दिन... - त्योहार आते हैं तो सुबह से मन का डोर कहीं खिंचा लगता है. अन्दर ही अन्दर थोड़ी उदासी रहती है. जैसे मज़ार पर भीनी भीनी अगरबत्ती जलती रहती है. कोई अन्दर से थप...6 माह पहले
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लोकतंत्र या तंत्रलोक ? - इन दिनों देश में एक के बाद एक हो रहे खुलासों से यह राय सुद्रढ़ हो रही है कि “भारत के सभी संसाधनों" पर चन्द रईसों और ताकतवर लोगों का कब्जा है। रईसों और ता...7 माह पहले
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समाजवादी चिंतक किशन पटनायक को श्रद्धांजलि के साथ राजेंद्र राजन की एक कविता - तुम थे हमारे समय के राडार तुम थे हमारे ही तेजस रूप हमारी चेतना की लौ हमारी बेचैनियों की आंख हमारा सधा हुआ स्वर हमारा अगला कदम। जब राजनीति व्यापार में बदल र...7 माह पहले
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नास्तिकों की भाषा : काव्य शृंखला - *हिंदुस्तान के सबसे बड़े और महानतम नास्तिक अमर शहीद भगत सिंह को समर्पित हैं ये कविताएं। भगत सिंह जो हमें हर समय मनुष्य की अपराजेय कर्मशीलता की याद दिलात...7 माह पहले
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शैटर्ड ग्लास - पत्रकारी वीर बालकत्व पर एक अमरीकी फ़िल्म है.. फ़िल्म के पीछे यह कहानी है.. कहानी वैसे थोड़ी पुरानी, 1998, की है, मगर आज के समय में कहीं ज्यादा प्रासं...7 माह पहले
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वही कमाई खरी है जो किसी के काम आ जाए - - डॉ.चन्द्रकुमार जैन ======================= आज सवेरे की ही तो बात है. रविवार की सुबह. चाय की चुस्कियों के साथ-साथ श्री वागीश की एक लघु कथा पढ़ रहा था. वह ...7 माह पहले
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समकालीन सरोकार का प्रवेशांक पाठकों के हाथ में - प्रधान संपादक --सुभाष राय संपादक --हरे प्रकाश उपाध्याय फोन संपर्क--9455081894, 87562199028 माह पहले
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तेरी हंसी से होती है तर-बतर धरती - बारिश होती है तेरी हंसी से होती है तर-बतर धरती पार्क में, जहाँ जमा हो गया है पानी, उड़ाते हैं बच्चे तेरी हंसी के छींटे एक-दूसरे पर बच्चे हंसी से नहाते हैं खि...8 माह पहले
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..जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक अमृता - वर्ष कोयले की तरह बिखरे हुए कुछ बुझ गये, कुछ बुझने से रह गये वक्त का हाथ जब समेटने लगा पोरों पर छाले पड़ गये…. तेरे इश्क के हाथ से छूट गयी और जिन्दगी की हन्डि...8 माह पहले
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वो चबूतरा.... - शाम का इंतज़ार करते हम और हमारा इंतज़ार करता चबूतरा। हमारी दिन भर की कारगुजारियों का कच्चा चिट्ठा वहीं तो खुलता था। खिलखिलाता, गुनगुनाता, एक दूसरे क...9 माह पहले
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उस एक क्षण में... - साँझ के उस पार, पैर लटकाए हुए तुम क्या क्या बड़बडाये जाते हो। और जब चिढ कर, लगाता हूँ तुम्हे आवाज! कर्कश! तो पलट कर टिका देते हो दृष्टि, बाँध देते हो चितवन।...9 माह पहले
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और फिर तुम्हारी याद ! - *आज एक नज़्म लिखी तुम्हारे लिये ...इतनी सारी यादो के साथ जीना !!!!* * * *"और फिर तुम्हारी याद !"* *एक छोटा सा धुप का टुकड़ा अचानक ही फटा हुआ आकाश बेहिसाब ...10 माह पहले
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दर्शक की परीक्षा है शांघाई - ये सब फेसबुक पर ही ठेलने का सोचा था क्योंकि आजकल विचार भी स्टेटस/ट्विटर टाईप छोटे छोटे टुकड़े में आते हैं पर थोड़ी ही देर में लगा दो-चार लाइन में बा...11 माह पहले
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मनुष्य, रोबोट और क्लोन - इस ब्लॉग पर वर्तमान शृंखला लिखते समय मैं स्वत:स्फूर्त अंदाज में हूं। इस बार लिखते समय पहले की भाँति कोई तैयारी नहीं कर रहा। कोई संदर्भ नहीं देख रहा, कोई उद...11 माह पहले
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कलयुग आ गया ? - बहुत दिनो के बाद आज मन ने कहा चलो आज कुछ लिखे, तो सोचा क्या लिखूं? तभी मन ने कहा जो तुम इस दुनिया मे देखते हे वोही लिखो....यह कोई कहानी नही एक सच्ची घटना ह...11 माह पहले
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Hello world! - Welcome to WordPress. This is your first post. Edit or delete it, then start blogging!1 वर्ष पहले
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बोलो तो मुसीबत, चुप रहो तो मुसीबत!! - रवीन्द्र प्रभात एक सुलझे हुए चिट्ठाकार हैं जिनके आलेख मैं उनकी चिट्ठाकारी के आरंभ से ही पढता आया हूँ. उनके कई आलेख बहुत ही विचारोत्तेजक रहे हैं एवं उन आले...1 वर्ष पहले
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विस्तार संकुचन - विस्तार संकुचन . कभी गोलू कभी गोटली कभी पोलू कभी पोटली कभी बिट्टू कभी किट्टू कभी पठ्ठा कभी पप्पू कह कर उसे बुलाता और वह हर बार हां पापा ! कह कर दौडा आता और...1 वर्ष पहले
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है जवाब किसी के पास? - पान सिंह अपने अफ़सर से कहता है-- चौथी फ़ेल हूं, आदमी पढ़ा है। ये संवाद लिखा पान सिंह के लिए गया लेकिन संवाद का दूसरा हिस्सा इरफ़ान के लिए सटीक है...आदमी ...1 वर्ष पहले
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फागुन आया - इष्ट देव सांकृत्यायन महक रहे हैं बौर झूम रही अमवा की डारी फागुन आया. सांझ ढले सारे परहेजी निकल गए भौंराबारी कि फागुन आया. अनमन हैं कुछ मोती बाबा पलट र...1 वर्ष पहले
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बिना तुम्हारे - गीत : नागेश पांडेय 'संजय' बिना तुम्हारे साथी हर अभियान अधूरा है. आज शोभते राजमार्ग, थीं जहाँ कभी पथरीली राहें, किन्तु चहकती चौपाटी पर जागा हुआ...1 वर्ष पहले
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अवकाश - आदरणीय ब्लागर मित्रो, अस्वस्थ होने के कारण शायद अंतरजाल पर न आ पाऊँ । इसलिए कुछ समय के लिए शायद आप से भेंट न हो। स्वास्थ लाभ करके पुनः आपसे सम्पर्क स्था...1 वर्ष पहले
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कटी-छँटी सी लिखा-ई - सोच बात पूरी नही होती खयाल छोड देते हैं साथ अध-बीच कोई सिरा जुडता नहीं कोई शैतान है भीतर फ़ूंक कर बिखेर देता है ताना-बाना और कहता है देखा? गर पैसे होते बादा...1 वर्ष पहले
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अदम जी मुझे लौकी नाथ कहते थे - जयपुर में अदम जी मंच संचालन कर रहे थे। मुझे कविता पढ़ने बुलाने के पहले एक किस्सा सुनाया। किसी नगर में एक बड़े ज्ञानी महात्मा थे। उनका एक शिष्य था नाम था...1 वर्ष पहले
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'लेडिस' से त्रस्त जेंट्स - हमारे देश में एक तरफ तो महिलाओं की बराबर की हिस्सेदारी की बात होती है, तो वहीँ दूसरी ओर महिलायें खुद महिला होने का फायदा उठाती हैं. जी नहीं, ये कोई नारीवाद क...1 वर्ष पहले
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रुकी हुई रेल - *हिलते पर्दे से छनकर रौशनी आती है , शीशे के बोल में अरालिया की एक लतर , किताबों की टांड में एक ग्रॉसमन , रिल्के की ना समझी कोई कविता की एक अदद पंक्ति, चाय ...1 वर्ष पहले
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महाभियोग की कार्रवाई से पहले हाई कोर्ट न्यायाधीश ने इस्तीफा दिया - महाभियोग की कार्रवाई का सामना कर रहे कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायधीश सौमित्र सेन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सेन ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया ...1 वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़ी गज़ल : पीरा संग मया होगे - अइसन मिलिस मया सँग पीरा, पीरा सँग मया होगे. पथरा ला पूजत-पूजत मा, हिरदे मोर पथरा होगे. महूँ सजाये रहेंव नजर मा सीस महल के सपना ला , अइसन टूटिस सीस महल के ...1 वर्ष पहले
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विश्वास - ------------------------------ ओ ! जीवन के थके पखेरू, बढ़े चलो हिम्मत मत हारो, पंखों में भविष्य बंदी है मत अतीत की ओर निहारो, क्या चिंता धरती यदि छूटी उड़ने...2 वर्ष पहले
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एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी – ग्यारहवाँ दिन – तीन - *भूख मिटाने का कुछ इन्तज़ाम किया जाए* अजय ने अचानक बीच में सवाल किया “ लेकिन यार इन गुफाओं का पता कैसे चला ? इन तक भी डॉ. वाकणकर जैसा कोई व्यक्ति पहुँचा थ...2 वर्ष पहले
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Broccoli Soup - ब्रोकली सूप - ब्रोकली के सूप कई तरह से बनाये जाते हैं. सफेद वेजीटेबल स्टॉक से बना यह ब्रोकली सूप जितना बनाने में आसान है उतना ही पीने में मजेदार.2 वर्ष पहले
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दुनियादारी के दबाव में डगमगाता आत्मविश्वास - मेरी बचपन की सहेली ने, अपनी एक विचित्र समस्या से निज़ात पाने के लिए मुझे फोन किया और कहा,“ रचना! मेरे घर के सामने एक औरत आकर बस गयी है जो बहुत फूहड़ और बदत...2 वर्ष पहले
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पश्मीना बालों में उलझी समय की गर्मी - उत्तरों से भरे इस दौर में अपर्णा भटनागर की कविताओं की प्रश्नाकुलता बेचैन कर देती है. अगर उनमें सुन्दर की सम्भावना है तो समय की खराशें भी हैं, आकांक्षाओं ...2 वर्ष पहले
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त्रासदी...माइ फुट! - नूर भोपाली का पूरा परिवार यूनियन कार्बाइड के कारखाने से निकली मिक गैस के जहरीले असर से मारा गया था। बूढ़ी माँ, भली-चंगी पत्नी, एक बेटा और दो बेटियाँ--सब उसी...2 वर्ष पहले
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किशोर'दा - ये शाम भी अजीब है…! - किशोर'दा : याद तो हमेशा आते रहते हैं, सो कैसे कहूँ कि आज ज़्यादा याद आए? मगर यह कह सकता हूँ कि आज मन किया कि उनके कुछ गीत सुनाऊँ चाहने वालों को - जो शायद उन...2 वर्ष पहले
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Akhilesh ji ko patr - 27. 9. 10 प्रिय अखिलेश जी, आपका पत्र संख्या 2, दिनांक 21. 9 10 का पत्र मिला। धन्यवाद। आपने पुस्तकें वापिस करने वाले प्रश्न पर जवाब सोच समझकर ही दिया होगा तभ...2 वर्ष पहले
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अभिशप्त एक और भोपाल! एंडरसन भागा नहीं है !!!! - ये देश में हर जगह पैदा हो रहे भोपाल का किस्सा है ,ये हिंदुस्तान के स्विट्जरलेंड की तबाही का किस्सा है ,ये रिहंद बाँध में अपने महल के साथ डूब गयी रानी र...2 वर्ष पहले
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सिनेमा देखने जाएंगे तो गँवारू ही कहलाएंगे, मूवी देखिए जनाब !! - आप अपने घर को फ्लैट कहना पसन्द करते हैं या अपार्टमेंट ? फिल्म देखने जाएँ तो उसे सिनेमा देखना कहेंगे या मूवी ? भई तय रहा कि आप 'सिनेमा देखने जाएंगे ' तो गँव...3 वर्ष पहले
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साधनाजी,उपासनाजी, उर्फ… - बाबाओँ का हल्ला है। बल्कि दिल्ली के बाबा भीमानंद का विकट कालगर्ली रैकेट देखकर यह नहीं समझ आ रहा है कि अब बाबाजी का कौन सा मुहल्ला है। सारे मुहल्ले ही उनके ...3 वर्ष पहले
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किताबें बचेंगी तो पढ़ना बचेगा, लिखना भी - कई समय से मन था कि कोई ऐसी जगह बने जहां हिंदी किताबों के बारे में नये सिरे से बात हो सके. अगर किताबें होंगी तो लिखना और पढ़ना भी बचा रहेगा. हमारी ये बातचीत...3 वर्ष पहले
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औक़ात में रखनेवाले... - यार ये तो वही है जो महिलाओं के बारे में बकवास करती रहती है। ये कहते ही मेरे कान खड़े हो गए। स्वभाव और आवाज़ दोनों में ही मैं तेज़ हूँ। और मैंने कहा हाँ ठीक ह...4 वर्ष पहले
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