राणा प्रताप सिंह की कविताऍं
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*एक*
*नदियाँ आज गंधाती*
मल मूत्र प्रदूषण से बजबजाती
धरती में गड़ रही है,,,
नदियाँ आज सड़ रहीं हैं।
लोगों के चढ़ावे फूल पत्ती
विसर्जित...
18 घंटे पहले